श्रीमती अब नहीं, आखिरकार सीईओ

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अध्याय 95

अपहरणकर्ता की धमकियाँ स्पीकरफोन से गूँजती हुई खाली गोदाम की दीवारों से टकराकर लौट रही थीं।

उधर दूसरी तरफ़ अचानक कब्र जैसी ख़ामोशी छा गई।

यह ख़ामोशी पूरे पंद्रह सेकंड तक खिंचती चली गई—इतनी लंबी कि अपहरणकर्ता भी अनायास साँस रोके बैठे रह गए।

उनके चेहरों पर जमीं तिरछी मुस्कानें ठिठक गईं, जैसे उन्हें ...

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